Episode notes
भारत के इतिहास की इस आकर्षक कड़ी में, हम कोह-ए-नूर हीरे की किंवदंती भरी यात्रा का पीछा करते हैं — उसके गोलकोंडा की खदानों में चमकदार उद्गम से लेकर ब्रिटिश क्राउन ज्वेल्स में उसके विवादास्पद ठिकाने तक। यह केवल एक रत्न नहीं, बल्कि साम्राज्य, महत्वाकांक्षा और इतिहास की हिंसक लहरों का प्रतीक है। जीवंत कहानी के माध्यम से, हम देखते हैं कि यह हीरा कैसे काकतीय राजाओं, मुग़ल सम्राटों, फ़ारसी आक्रमणकारियों, अफ़ग़ान वंशों और सिख शासकों के हाथों से गुज़रता है — हर एक इसकी विरासत पर अपनी छाप छोड़ता है। हम खोजते हैं कि यह रत्न कैसे भारत में एक आध्यात्मिक और साम्राज्यिक चिह्न से उपनिवेशवादी विजय की चमचमाती ट्रॉफी बन गया।
लेकिन कहानी क्वीन विक्टोरिया पर समाप्त नहीं होती। यह एपिसोड आधुनिक समय में उसके स्वामित्व को लेकर चल रही लड़ाई, सांस्कृतिक पुनर्स्थापन, और उपनिवेशोत्तर स्मृति की परतों को भी खोलता है। कोह-ए-नूर उन लोगों के लिए क्या दर्शाता है जिनसे यह छीन ...