2. S01 - E02 आज मैंने अपनी ऐसी ही...

2. S01 - E02 आज मैंने अपनी ऐसी ही कुछ डायरियॉं निकालीं आलमारी से! 😊

'Wah! Ye Diariyaan' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐ... by Mahesh Vallabh Pandey 'ऐ दर्द!'
S1 · E2
Mar 29, 2022
08:39

Episode notes

जब मैं उनको निकालने गया, तो एक शेल्फ में सारी की सारी आराम से सो रहीं थीं; दराज़ के खुलने की आवाज़ सुनते ही, दो तीन डायरियों ने तो करवट बदल के मुझे देखा और मुस्कुराईं!😊

-आ पास आ, न दूर जा, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,

न तोड़ कर, न फोड़ कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,

मेरे भी अंदर आग है, मेरा लहू भी लाल है,

न रंग कर, न भंग कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ!

-मुझको भी हंसी आती है, जब देखता हूँ आईना,

न चेहरा बना, न चेहरा छुपा, कि मैं भी तेरे जैसा हूं!

-आ पास आ, न दूर जा, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,

न तोड़ कर, न फोड़ कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,

मेरे भी अंदर आग है, मेरा लहू भी लाल है,

न रंग कर, न भंग कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ!

-इस रंगदारी में कई, कितने हुनर सीखे नहीं,

इंसान हूं, मौला नहीं, कि मैं भी तेरे जैसा हूं!

-आ पास आ, न दूर जा, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,

न तोड़ कर, न फोड़ कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,

मेरे भी अंदर आग है, मेरा लहू भी लाल है,

न रंग कर, न भंग कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ!

-कई शामें मैंने काटीं हैं, अपने उन जज़्बातों के साथ,

फ़क्र हुआ ये जान के, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ!

-आ पास आ, न दूर जा, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,

न तोड़ कर, न फोड़ कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,

मेरे भी अंदर आग है, मेरा लहू भी लाल है,

न रंग कर, न भंग कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ!

-हासिल नहीं, तो दर-ब-दर, जाता रहा मैं हर गज़र,

हासिल नहीं, मुमकिन नहीं, कि मैं भी तेरे जैसा हूं!

-आ पास आ, न दूर जा, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,

न तोड़ कर, न फोड़ कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,

मेरे भी अंदर आग है, मेरा लहू भी लाल है,

न रंग कर, न भंग कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ!

-'ऐ दर्द' उठते बैठते, कोई गिला तो कर जिंदगी से,

बंद कर दे वर्ना ये कहना, कि मैं भी तेरे जैसा हूं!

-आ पास आ, न दूर जा, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,

न तोड़ कर, न फोड़ कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,

मेरे भी अंदर आग है, मेरा लहू भी लाल है,

न रंग कर, न भंग कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ!