
Episode notes
🤗क्या आपने कभी डायरी लिखी है दोस्तों? क्या आपने कभी अपनी यादों को किसी डायरी के पन्नों में छुपा के रखा है?
-यादें पन्ने जैसी, ज़िल्द वक़्त सी है,
किताबें अरमां जैसी, सिलाई सख़्त सी है,
खुले न खुले ये साफ़ा, कौन जाने,
मुसन्निस दिलचस्प सा, कहानी मस्त सी है!
-हमें न उससे कोई गिला, न एहतराम कोई,
वो भी हमसे नाखुश, और न कोई खुशी सी है!
-यादें पन्ने जैसी, ज़िल्द वक़्त सी है,
किताबें अरमां जैसी, सिलाई सख़्त सी है,
खुले न खुले ये साफ़ा, कौन जाने,
मुसन्निस दिलचस्प सा, कहानी मस्त सी है!
-आग़ाज़ न कर पाए, तो एक ख़लिश सी रही,
न मेहमां ही मिला, और ख़ुश्क ज़मीन सी है!
-यादें पन्ने जैसी, ज़िल्द वक़्त सी है,
किताबें अरमां जैसी, सिलाई सख़्त सी है,
खुले न खुले ये साफ़ा, कौन जाने,
मुसन्निस दिलचस्प सा, कहानी मस्त सी है!
-फ़रोख़्त का हिसाब क्या रखना, जब की उनकी बाबत,
ना बाज़ार में दिखी, ना नज़र में वो ही है!
-यादें पन्ने जैसी, ज़िल्द वक़्त सी है,
किताबें अरमां जैसी, सिलाई सख़्त सी है,
खुले न खुले ये साफ़ा, कौन जाने,
मुसन्निस दिलचस्प सा, कहानी मस्त सी है!
-उम्दा फासाना, उम्दी जुबान, उम्दा तराना,
मेरी जवानी बे-आबरू, बहुत बड़ी सी है!
-यादें पन्ने जैसी, ज़िल्द वक़्त सी है,
किताबें अरमां जैसी, सिलाई सख़्त सी है,
खुले न खुले ये साफ़ा, कौन जाने,
मुसन्निस दिलचस्प सा, कहानी मस्त सी है!
-'ऐ दर्द', मुनव्वर सा है तेरा ठिकाना.
बस कमी इसमें, कुछ चांद सितारों की है!
-यादें पन्ने जैसी, ज़िल्द वक़्त सी है,
किताबें अरमां जैसी, सिलाई सख़्त सी है,
खुले न खुले ये साफ़ा, कौन जाने,
मुसन्निस दिलचस्प सा, कहानी मस्त सी है!
