जल ही क्यों? तर्पण का अर्थ
जल ही क्यों? तर्पण का अर्थ
AI
धर्म कथा by Bhaskar Pandey
S1 · E10
Oct 1, 2026
09:14
Episode notes

धर्म कथा · पहला सीज़न: पितृ पक्ष · एपिसोड 10

हथेली आगे कीजिए, और सोचिए कि उसमें जल है। ठंडा, साफ़, साधारण जल। वैसा जो हम बिना सोचे पी लेते हैं। अब सोचिए कि यह जल एक संदेश है।

पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 6।

स्रोत। श्रेणी: गंगा की कथा में जल शास्त्र है, वाल्मीकि रामायण, बालकांड, सर्ग इकतालीस और चौवालीस से। तर्पण की विधि के ब्योरे, दिशा, तिल, कुश और तीन बार जल, जीवित परंपरा हैं। तर्पण शब्द का अर्थ, तृप् धातु से, तृप्त करना, संस्कृत भाषा का है। तीसरा उत्तर और छोड़ देने की बात मेरी अपनी है, शास्त्र नहीं।

सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।