भगीरथ के हज़ार वर्ष
भगीरथ के हज़ार वर्ष
AI
धर्म कथा by Bhaskar Pandey
S1 · E8
Oct 1, 2026
11:25
Episode notes

धर्म कथा · पहला सीज़न: पितृ पक्ष · एपिसोड 8

हज़ार वर्ष पूरे हुए, तब आकाश से एक वाणी गूँजी। आग के बीच खड़े उस पुरुष को पता ही नहीं था कि कितना समय बीत गया। धूप ने त्वचा काली कर दी थी। बाँहों का दर्द कब का मर चुका था। उसने अपने बारे में सोचना छोड़ दिया था। अब वह बस एक इच्छा था, दो पैरों पर खड़ी: नदी आ जाए। और तभी आकाश खुला, और सृष्टि के रचयिता स्वयं उसके सामने खड़े थे।

पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 7।

स्रोत। श्रेणी: शास्त्र। यह कथा वाल्मीकि रामायण, बालकांड, सर्ग बयालीस और सर्ग तैंतालीस के आरंभ से है। ब्रह्माजी का वरदान, भगीरथ के दोनों वर, और पृथ्वी के गंगा का पतन न सह पाने की बात, मूल पाठ में हैं। संस्कृत पंक्तियाँ रामायण एक, बयालीस, चौबीस के पूर्वार्ध, एक, तैंतालीस, एक, और एक, तैंतालीस, तीन की हैं। शिव का प्रकट होना और गंगा को मस्तक पर धारण करने का वचन मूल पाठ में है। भगीरथ के मन के भाव और ठहराव पर मेरी टिप्पणिय ...