ईश्वर अर्जुन संवाद श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 8 - अधर्म का नाश और धर्म की स्थापना
गीता का सार (Geeta Ka Saar) #BhagavadGita #SpiritualKnowledg... by Mohit Sharma
Episode notes
क्या आप जीवन की कठिनाइयों से जूझ रहे हैं? श्रीमद्भगवद्गीता में आपकी सभी समस्याओं का समाधान छुपा है। इस वीडियो में जानिए कैसे भगवद्गीता के अध्याय और श्लोक आपकी समस्याओं का समाधान दे सकते हैं। चाहे वो डर हो, लालच, क्रोध, आलस्य, या शांति की तलाश—हर समस्या का उत्तर यहाँ मिलेगा।🔸 समस्याओं के समाधान: कौन से अध्याय और श्लोक आपकी समस्याओं का उत्तर देते हैं? जानने के लिए वीडियो देखें।🔸 उच्चारण की विधि: गीता के श्लोकों का सही उच्चारण कैसे करें? सरल विधि और तकनीक के साथ जानिए।👉आज के श्लोक 8 में श्रीकृष्ण कहते हैं:परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥इसका अर्थ है:'सज्जनों की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए मैं युग-युग में अवतरित होता हूँ।'इस श्लोक में श्रीकृष्ण अपने अवतार के तीन उद्देश्यों को बताते हैं: सज्जनों की रक्षा, अधर्मियों का नाश, और धर्म की पुनः स्थापना। यह दिव्य संदेश हमें आश्वासन देता ह ...