ईश्वर अर्जुन संवाद श्रीमद्भगवद्गी...
ईश्वर अर्जुन संवाद श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 6 - श्रीकृष्ण का अविनाशी स्वरूप और दिव्य जन्म का रहस्य
गीता का सार (Geeta Ka Saar) #BhagavadGita #SpiritualKnowledg... by Mohit Sharma
S4 · E5
Oct 26, 2024
31:36
Episode notes

क्या आप जीवन की कठिनाइयों से जूझ रहे हैं? श्रीमद्भगवद्गीता में आपकी सभी समस्याओं का समाधान छुपा है। इस वीडियो में जानिए कैसे भगवद्गीता के अध्याय और श्लोक आपकी समस्याओं का समाधान दे सकते हैं। चाहे वो डर हो, लालच, क्रोध, आलस्य, या शांति की तलाश—हर समस्या का उत्तर यहाँ मिलेगा।🔸 समस्याओं के समाधान: कौन से अध्याय और श्लोक आपकी समस्याओं का उत्तर देते हैं? जानने के लिए वीडियो देखें।🔸 उच्चारण की विधि: गीता के श्लोकों का सही उच्चारण कैसे करें? सरल विधि और तकनीक के साथ जानिए।👉आज के श्लोक 6 में श्रीकृष्ण कहते हैं:अजोऽपि सन्नव्ययात्मा भूतानामीश्वरोऽपि सन्।प्रकृतिं स्वामधिष्ठाय सम्भवाम्यात्ममायया॥इसका अर्थ है:'यद्यपि मैं अजन्मा, अविनाशी और सभी प्राणियों का परम ईश्वर हूँ, फिर भी मैं अपनी माया से अपनी प्रकृति के आधार पर अवतरित होता हूँ।'इस श्लोक में श्रीकृष्ण अपने अविनाशी और अजन्मा स्वरूप को समझाते हैं। वे बताते हैं कि वे इस सृष्टि के सर्वेश्रेष्ठ ईश्वर होते ... 

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