

'Wah! Ye Diariyaan' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐं)!'
Stagione 5

42. S05 - E02 ताम़ीर है किसी से मेरा नक़्श-ए-मकॉं कब से🏡

41. S05 - E01 जब कभी तीम़ारदारी से मिले फ़ुरसत हमें☹️

'Wah! Ye Diariyaan'_SEASON 05_ALL EPISODES
Stagione 4

40. S04 - E10 कुछ तक़ाज़ा उम्र का था, कुछ मेरी नादानी थी😌

39. S04 - E09 बिना सुकून के शायद, मुझे ख़्याल नहीं😊

38. S04 - E08 इतनी मुद्दत हो गयी, तुमको देखा भी नहीं😔

37. S04 - E07 मैं वो हूँ जो सामने हूँ, मेरे पीछे कुछ भी नहीं🌹

36. S04 - E06 तुम जिसे कहती हो माया, जानती हो तुम इसे👑

35. S04 - E05 ग़र तस़व्वुर में तुम्हें लाऊं तो क्युं कर लाऊं मैं🌹
