34. S04 - E04 बन्द द़रीचे पडे़ थे...

34. S04 - E04 बन्द द़रीचे पडे़ थे, खुश्क़ थी आब़-ओ-ह़वा😔

'Wah! Ye Diariyaan' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐ... di Mahesh Vallabh Pandey 'ऐ दर्द!'
S4 · E4
11 ott 2022
07:32

Note sull'episodio

आरसी में देखकर, खुद को ही, हँस पड़ता था मैं😀

Parole chiave

बन्द द़रीचे पडे़ थे खुश्क़ थी आब़ ओ ह़वा
आरसी में देखकर खुद को ही हँस पड़ता था मैं