3. S01 - E03 लगभग तीस साल की होने...

3. S01 - E03 लगभग तीस साल की होने जा रहीं थीं मेरी डायरियॉं!🥰

'Wah! Ye Diariyaan' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐ... di Mahesh Vallabh Pandey 'ऐ दर्द!'
S1 · E3
29 mar 2022
05:21

Note sull'episodio

इ्न्हें पाल-पोस के बड़ा करना कोई मज़ाक की बात नहीं थी; अपने डैडी, मम्मी, भाईयों और बहनों से छुपते-छुपाते लिखी गईं थीं ये डाएरियॉं!🥰

-मेरी हर किताब का मसला एक है,

आख़िर में लिखा मिलेगा, खुदा एक है!

-ग़म नहीं मुझे, मिले हर दौर में सज़ा,

जानता हूं मैं कि मेरा काम नेक है!

-मेरी हर किताब का मसला एक है,

आख़िर में लिखा मिलेगा, खुदा एक है!

-सोचता रहा हमेशा, कभी तो वक्त आएगा,

और कहेगा, कि लिजिये, हालात पेश है!

-मेरी हर किताब का मसला एक है,

​​आख़िर में लिखा मिलेगा, खुदा एक है!

-सिसकिओं से भर लिया कूचा-ए-दिल तमाम,

समझे वो कि दीवानों की, यही एक जेब है!

-मेरी हर किताब का मसला एक है,

आख़िर में लिखा मिलेगा, खुदा एक है!

-हम फ़ना होते ही समझे जिंदगी है क्या,

हर समंदर के तले होती रेत है!

-मेरी हर किताब का मसला एक है,

आख़िर में लिखा मिलेगा, खुदा एक है!

-मैं क्यूँ डरता हूं जमाने से, समझ में आ गया,

मैं अकेला हूं खड़ा, पर वो एक है!

-मेरी हर किताब का मसला एक है,

आख़िर में लिखा मिलेगा, खुदा एक है!