1. S01 - E01 यादें सिमटतीं हैं ऐस...

1. S01 - E01 यादें सिमटतीं हैं ऐसे, कि जैसे झुलसीं हुईं हैं!🤗

'Wah! Ye Diariyaan' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐ... di Mahesh Vallabh Pandey 'ऐ दर्द!'
S1 · E1
28 mar 2022
09:31

Note sull'episodio

🤗क्या आपने कभी डायरी लिखी है दोस्तों? क्या आपने कभी अपनी यादों को किसी डायरी के पन्नों में छुपा के रखा है?

-यादें पन्ने जैसी, ज़िल्द वक़्त सी है,

किताबें अरमां जैसी, सिलाई सख़्त सी है,

खुले न खुले ये साफ़ा, कौन जाने,

मुसन्निस दिलचस्प सा, कहानी मस्त सी है!

-हमें न उससे कोई गिला, न एहतराम कोई,

वो भी हमसे नाखुश, और न कोई खुशी सी है!

-यादें पन्ने जैसी, ज़िल्द वक़्त सी है,

किताबें अरमां जैसी, सिलाई सख़्त सी है,

खुले न खुले ये साफ़ा, कौन जाने,

मुसन्निस दिलचस्प सा, कहानी मस्त सी है!

-आग़ाज़ न कर पाए, तो एक ख़लिश सी रही,

न मेहमां ही मिला, और ख़ुश्क ज़मीन सी है!

-यादें पन्ने जैसी, ज़िल्द वक़्त सी है,

किताबें अरमां जैसी, सिलाई सख़्त सी है,

खुले न खुले ये साफ़ा, कौन जाने,

मुसन्निस दिलचस्प सा, कहानी मस्त सी है!

-फ़रोख़्त का हिसाब क्या रखना, जब की उनकी बाबत,

ना बाज़ार में दिखी, ना नज़र में वो ही है!

-यादें पन्ने जैसी, ज़िल्द वक़्त सी है,

किताबें अरमां जैसी, सिलाई सख़्त सी है,

खुले न खुले ये साफ़ा, कौन जाने,

मुसन्निस दिलचस्प सा, कहानी मस्त सी है!

-उम्दा फासाना, उम्दी जुबान, उम्दा तराना,

मेरी जवानी बे-आबरू, बहुत बड़ी सी है!

-यादें पन्ने जैसी, ज़िल्द वक़्त सी है,

किताबें अरमां जैसी, सिलाई सख़्त सी है,

खुले न खुले ये साफ़ा, कौन जाने,

मुसन्निस दिलचस्प सा, कहानी मस्त सी है!

-'ऐ दर्द', मुनव्वर सा है तेरा ठिकाना.

बस कमी इसमें, कुछ चांद सितारों की है!

-यादें पन्ने जैसी, ज़िल्द वक़्त सी है,

किताबें अरमां जैसी, सिलाई सख़्त सी है,

खुले न खुले ये साफ़ा, कौन जाने,

मुसन्निस दिलचस्प सा, कहानी मस्त सी है!