समुदाय की आवाज़ें | Voices from the Community
लिखे जो ख़त मुझे मयूर त्रिवेदी के साथ | Likhe Jo Khat Mujhe... di Radio Azim Premji University
Note sull'episodio
आज का पत्र है पश्चिमी भारत के लिटल रण ऑफ कच्छ से। शहर और गाँव से मिलों दूर ये एक ऐसी जगह हैं जहा अगारिया समुदाय के लोग नमक की खेती करते हैं। हमारे देश का आधे से ज्यादा नमक यही से इनकी मेहनत से ही आता हैं। यह पत्र विमुक्त जनजाति के एक बुजुर्ग अगारिया का हैं जो मुजे पिछले दस सालों से जानते हैं। मैं एक स्टूडेंट के रूप मे उनको मिला था और बाद मे अपने स्टूडेंट्स को फील्ड के अनुभव के लिए उनके पास ले जाया करता था। इस खत के जरिए वो मेरी और उनकी जिंदगी मे इन सालों मे आए बदलाव की बात कर रहे हैं। हमारे संपर्क के एकतरफ़े रुख से अपनी नाराज़गी जताकर वो इस खत मे उन सभी लोगों से सवाल कर रहे हैं जो समय-समय पर उनके पास जाकर उनसे सवाल पूछते रहे, उनकी कहानिया सुनते रहे, और उनके जीवन के आंकड़ों को लिखते रहे, लेकिन जो कभी वापस नहीं आए – न ही उनकी खबर पूछने आए या ना ही बदलाव की कोई खबर लेकर आए । आइए, सुनते हैं डांट, दर्द, और चाहभरी उनकी दास्तान जिनकी मेहनत से बना नमक हमा ...