दिल की आवाज़ें | Sounds Of The Heart
लिखे जो ख़त मुझे मयूर त्रिवेदी के साथ | Likhe Jo Khat Mujhe... di Radio Azim Premji University
Note sull'episodio
बचपन में जिन माँ-बाप की बातें पत्थर की लकीर लगती थीं, बड़े होकर उन्हीं से असहमति होने लगती है। विचारों की यह खाई अकादमिक दुनिया से जुड़े लोगों के लिए और गहरी हो जाती है, जब उनके सिद्धांत घर की हकीकत से टकराते हैं।
“दिल की आवाज़ें” एपिसोड में एक माँ अपने बेटे—जो जेंडर स्टडीज के प्रोफेसर हैं—से अपने जीवन के संघर्ष साझा करती हैं। वह बताती हैं कि समाज की पहचान केवल किताबों से नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों से भी बनती है। माँ की बातों में एक हल्का-सा उलाहना भी है—“तुम पढ़कर जेंडर सिखाते हो, हम जीकर सीखते हैं। शायद मेरी ज़िंदगी के नोट्स तुम्हारी क्लासरूम में काम आएं।”
बड़ा होने के साथ-साथ हम अपने माता-पिता को सुनना कम कर देते हैं, जिससे वे धीरे-धीरे चुप हो जाते हैं। लेकिन इस एपिसोड में, एक माँ यह चुप्पी तोड़ती हैं—प्यार, फिक्र और समझ के साथ।
सुनिए “दिल की आवाज़ें”, “लिखे जो खत मुझे” के एपिसोड 3 में, सिर्फ़ रेडियो अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिट ...