ईश्वर अर्जुन संवाद श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 39 - कामना कैसे ज्ञान को विकृत करती है

गीता का सार (Geeta Ka Saar) #BhagavadGita #SpiritualKnowledg... di Mohit Sharma

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क्या आप जीवन की कठिनाइयों से जूझ रहे हैं? श्रीमद्भगवद्गीता में आपकी सभी समस्याओं का समाधान छुपा है। इस वीडियो में जानिए कैसे भगवद्गीता के अध्याय और श्लोक आपकी समस्याओं का समाधान दे सकते हैं। चाहे वो डर हो, लालच, क्रोध, आलस्य, या शांति की तलाश—हर समस्या का उत्तर यहाँ मिलेगा।🔸 समस्याओं के समाधान: कौन से अध्याय और श्लोक आपकी समस्याओं का उत्तर देते हैं? जानने के लिए वीडियो देखें।🔸 उच्चारण की विधि: गीता के श्लोकों का सही उच्चारण कैसे करें? सरल विधि और तकनीक के साथ जानिए।👉आज के श्लोक 39 में श्रीकृष्ण कहते हैं:आवृतं ज्ञानमेतेन ज्ञानिनो नित्यवैरिणा।कामरूपेण कौन्तेय दुष्पूरेणानलेन च॥इसका अर्थ है: 'हे अर्जुन, यह ज्ञान कामना के रूप में हमेशा से ही शत्रु रहा है। यह कामना अग्नि की भांति कभी तृप्त नहीं होती और ज्ञान को ढककर हमें भटकाती है।'यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि इच्छाएं और वासनाएं हमारे ज्ञान के शत्रु हैं। यह भावनाएं इतनी प्रबल होती हैं कि इन्हें शां ... 

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