ईश्वर अर्जुन संवाद श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 33 - स्वभाव और कर्म का गहरा संबंध
गीता का सार (Geeta Ka Saar) #BhagavadGita #SpiritualKnowledg... di Mohit Sharma
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क्या आप जीवन की कठिनाइयों से जूझ रहे हैं? श्रीमद्भगवद्गीता में आपकी सभी समस्याओं का समाधान छुपा है। इस वीडियो में जानिए कैसे भगवद्गीता के अध्याय और श्लोक आपकी समस्याओं का समाधान दे सकते हैं। चाहे वो डर हो, लालच, क्रोध, आलस्य, या शांति की तलाश—हर समस्या का उत्तर यहाँ मिलेगा।🔸 समस्याओं के समाधान: कौन से अध्याय और श्लोक आपकी समस्याओं का उत्तर देते हैं? जानने के लिए वीडियो देखें।🔸 उच्चारण की विधि: गीता के श्लोकों का सही उच्चारण कैसे करें? सरल विधि और तकनीक के साथ जानिए।👉श्लोक 33 में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं:सदृशं चेष्टते स्वस्याः प्रकृतेर्ज्ञानवानपि।प्रकृतिं यान्ति भूतानि निग्रहः किं करिष्यति॥इसका अर्थ है कि 'ज्ञानी व्यक्ति भी अपनी प्रकृति के अनुसार ही कार्य करता है। सभी प्राणी अपनी प्रकृति का अनुसरण करते हैं, तो दबाव या रोक-टोक से क्या लाभ?'इस श्लोक में भगवान हमें यह बताते हैं कि हर व्यक्ति का स्वभाव उसके कर्मों को प्रभावित करता है, चाहे वह ज्ञान ...