ईश्वर अर्जुन संवाद श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 34 - राग-द्वेष से कैसे पाएं मुक्ति

गीता का सार (Geeta Ka Saar) #BhagavadGita #SpiritualKnowledg... di Mohit Sharma

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क्या आप जीवन की कठिनाइयों से जूझ रहे हैं? श्रीमद्भगवद्गीता में आपकी सभी समस्याओं का समाधान छुपा है। इस वीडियो में जानिए कैसे भगवद्गीता के अध्याय और श्लोक आपकी समस्याओं का समाधान दे सकते हैं। चाहे वो डर हो, लालच, क्रोध, आलस्य, या शांति की तलाश—हर समस्या का उत्तर यहाँ मिलेगा।🔸 समस्याओं के समाधान: कौन से अध्याय और श्लोक आपकी समस्याओं का उत्तर देते हैं? जानने के लिए वीडियो देखें।🔸 उच्चारण की विधि: गीता के श्लोकों का सही उच्चारण कैसे करें? सरल विधि और तकनीक के साथ जानिए।👉श्रीकृष्ण श्लोक 34 में कहते हैं:इन्द्रियस्येन्द्रियस्यार्थे रागद्वेषौ व्यवस्थितौ।तयोर्न वशमागच्छेत्तौ ह्यस्य परिपन्थिनौ॥इसका अर्थ है कि 'प्रत्येक इंद्रिय के विषय में राग (आसक्ति) और द्वेष (घृणा) स्थित होते हैं। लेकिन मनुष्य को इन दोनों के वश में नहीं होना चाहिए, क्योंकि ये ही उसके मार्ग में बाधा उत्पन्न करते हैं।'इस श्लोक में श्रीकृष्ण समझाते हैं कि आसक्ति और घृणा हमारी इंद्रियों क ... 

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