'Wah! Ye Diariyaan' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐं)!'

'Wah! Ye Diariyaan' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐं)!'

por Mahesh Vallabh Pandey 'ऐ दर्द!'
Temporada 5

42. S05 - E02 ताम़ीर है किसी से मेरा नक़्श-ए-मकॉं कब से🏡

आया ही नहीं कोई पूछे जो पता हमसे❣️

41. S05 - E01 जब कभी तीम़ारदारी से मिले फ़ुरसत हमें☹️

तब कहीं जाकर जियेंगे ज़िंदगी हम शान से😀

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Bonus
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Temporada 4

40. S04 - E10 कुछ तक़ाज़ा उम्र का था, कुछ मेरी नादानी थी😌

वरना तुझसे बेख़बर होने से मुझको क्या मिला😌

39. S04 - E09 बिना सुकून के शायद, मुझे ख़्याल नहीं😊

मैं ख़ुद को भूल भी जाऊं, ऐसे हाल नहीं!😃

38. S04 - E08 इतनी मुद्दत हो गयी, तुमको देखा भी नहीं😔

बाद इक ज़माने के तुम आए, तो राहत मिल गयी😘

37. S04 - E07 मैं वो हूँ जो सामने हूँ, मेरे पीछे कुछ भी नहीं🌹

जो कहूँ मैं वो ही सच है, उस के पीछे कुछ नहीं!✨

36. S04 - E06 तुम जिसे कहती हो माया, जानती हो तुम इसे👑

देखा है कई बार तुमने, पहचानती हो तुम इसे🥰

35. S04 - E05 ग़र तस़व्वुर में तुम्हें लाऊं तो क्युं कर लाऊं मैं🌹

न तुम कहीं हो पास मेरे, न मैं तुम्हारा ख़ास हुं💕

34. S04 - E04 बन्द द़रीचे पडे़ थे, खुश्क़ थी आब़-ओ-ह़वा😔

आरसी में देखकर, खुद को ही, हँस पड़ता था मैं😀
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