9. S01 - E09 कल मेरी, मेरे मुकद्द...

9. S01 - E09 कल मेरी, मेरे मुकद्दर से मुलाकात हो गई!☺️

'Wah! Ye Diariyaan' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐ... di Mahesh Vallabh Pandey 'ऐ दर्द!'
S1 · E9
2 apr 2022
06:03

Note sull'episodio

मुकद्दर है ऐसा हसी़न, की कब क्या कर दे, कुछ पता ही नहीं!🥰

-कल मेरी मेरे मुक़द्दर से मुलाकात हो गई,

चमचमती सुबह से, स्याह रात हो गई,

वो चल रहा था साथ मेरे, पर क्यूँ पता नहीं,

जैसे ही मैं जल गया पूरा, बरसात हो गई!

-मुझको यक़ीं था हर गज़र, पर मेरे मुकद्दर को नहीं,

मैंने छूने की कोशिश जो की, मेरी सारी क़ायनात हो गई!

-कल मेरी मेरे मुक़द्दर से मुलाकात हो गई,

चमचमती सुबह से, स्याह रात हो गई,

वो चल रहा था साथ मेरे, पर क्यूँ पता नहीं,

जैसे ही मैं जल गया पूरा, बरसात हो गई!

-जुगनूओं के बीच में रहोगे तो खत्म हो जाओगे,

फिर न कहना, मेरी क्या औकात हो गई!

-कल मेरी मेरे मुक़द्दर से मुलाकात हो गई,

चमचमती सुबह से, स्याह रात हो गई,

वो चल रहा था साथ मेरे, पर क्यूँ पता नहीं,

जैसे ही मैं जल गया पूरा, बरसात हो गई!

-जब शगुन के पन्ने पलटे, कुछ सूखे से पत्ते मिले,

न जाने कब ज़िल्द उसकी, वारदात हो गई!

-कल मेरी मेरे मुक़द्दर से मुलाकात हो गई,

चमचमती सुबह से, स्याह रात हो गई,

वो चल रहा था साथ मेरे, पर क्यूँ पता नहीं,

जैसे ही मैं जल गया पूरा, बरसात हो गई!

-ऐ दर्द' नक़्श उलझे, अक्स सुलझे, कैसी कयामत, कैसा सफ़र,

एक अरसा गुज़र चुका क्या? सरकार की क्या जात हो गई!

-कल मेरी मेरे मुक़द्दर से मुलाकात हो गई,

चमचमती सुबह से, स्याह रात हो गई,

वो चल रहा था साथ मेरे, पर क्यूँ पता नहीं,

जैसे ही मैं जल गया पूरा, बरसात हो गई!