
Note sull'episodio
इंसान कुदरती, परेशानियों में रहने का आदी है; परेशानियां ना हों, तो लगता है, जिंदगी ठहर सी गई है!🙏
-न हो परेशॉं, इस शहर से नादां,
ना जाने कहां सुकूं मिल जाए,
न जाने कहां मंजिल हो तेरी,
या तुझमें किसी को मंजिल मिल जाए!
-वो तेरा शहर पुराना, भीड़ में भी है अकेला,
क्या पता तेरी पनाहों को यहाँ, महफ़िल मिल जाए!
-न हो परेशॉं, इस शहर से नादां,
ना जाने कहां सुकूं मिल जाए,
न जाने कहां मंजिल हो तेरी,
या तुझमें किसी को मंजिल मिल जाए!
-जिंदगी के चंद लम्हे, दे दे इस मांजर को भी,
कि जब कभी गुजरे यहाँ से, सांस तेरी मिल जाए!
-न हो परेशॉं, इस शहर से नादां,
ना जाने कहां सुकूं मिल जाए,
न जाने कहां मंजिल हो तेरी,
या तुझमें किसी को मंजिल मिल जाए!
-मत सोच क्यूँ कमजर्फ़ हैं सब, क्यूं सभी बेनूर हैं,
वक्त इतना है कहाँ, कि सबके जवाब मिल जाएं!
-न हो परेशॉं, इस शहर से नादां,
ना जाने कहां सुकूं मिल जाए,
न जाने कहां मंजिल हो तेरी,
या तुझमें किसी को मंजिल मिल जाए!
-मत सोच खुद को अजनबी, इस शहर में तब तलक,
जब तलक कोई दूजा, अजनबी न मिल जाए!
-न हो परेशॉं, इस शहर से नादां,
ना जाने कहां सुकूं मिल जाए,
न जाने कहां मंजिल हो तेरी,
या तुझमें किसी को मंजिल मिल जाए!
-इंसान जो कुछ चाहता है 'ऐ दर्द', मिलता है किसको कहां,
इसलि ऐ आशना, सब ठीक है जो मिल जाए!
-न हो परेशॉं, इस शहर से नादां,
ना जाने कहां सुकूं मिल जाए,
न जाने कहां मंजिल हो तेरी,
या तुझमें किसी को मंजिल मिल जाए!
