

सगर के साठ हज़ार पुत्र
Note sull'episodio
धर्म कथा · पहला सीज़न: पितृ पक्ष · एपिसोड 2
साठ हज़ार जवान बेटे एक सुबह अयोध्या से निकले। और लौटा कोई नहीं। जब बूढ़े पिता को ख़बर मिली, तो न कोई देह थी जिसे गोद में उठाया जाए, न कोई चिता थी जिसे अग्नि दी जाए। बस धरती के बहुत नीचे राख का एक ढेर था। और एक प्रतिज्ञा, जिसे निभाने में आगे की तीन पीढ़ियाँ खप गईं।
स्रोत। श्रेणी: शास्त्र। यह कथा वाल्मीकि रामायण, बालकांड, सर्ग अड़तीस से इकतालीस के अनुसार है। भृगु का वरदान, साठ हज़ार बीजों वाला तूँबा, इंद्र द्वारा घोड़े का हरण, पुत्रों का धरती खोदना और गरुड़ के वचन मूल पाठ में हैं। नगर के वर्णन और पुत्रों की भावनाओं के चित्र मेरी अपनी ओर से हैं, कथा को दृश्य बनाने के लिए जोड़े गए।
सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।