6. S01 - E06 इतनी गुरब़त में मुस्...

6. S01 - E06 इतनी गुरब़त में मुस्कुराना हुनर है!🙏

'Wah! Ye Diariyaan' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐ... por Mahesh Vallabh Pandey 'ऐ दर्द!'
T1 · E6
29 mar 2022
06:45

Notas del episodio

क्या आपको चारों तरफ गुरब़त ही गुरब़त नज़र आती है दोस्तों? क्या आप भी ऐसी गुरब़त में रहना चाहते हैं?🤞

-इतनी ग़ुरबत में मुस्कुराना, हुनर है,

पास हो तुम, फिर भी बुलाना, हुनर है,

क़त्ल करके, साफ़ करके दीवारों को,

हर सुबह अदालत को जाना, हुनर है!

-देखते ही देखते, दिल में हुए कई छेद,

उस पर भी दिल का कसमसाना, हुनर है!

-इतनी ग़ुरबत में मुस्कुराना, हुनर है,

पास हो तुम, फिर भी बुलाना, हुनर है,

क़त्ल करके, साफ़ करके दीवारों को,

हर सुबह अदालत को जाना, हुनर है!

-जो रात में हुई, वो बात नाबात थी,

सुबह हुई, फिर वही बात बताना, हुनर है!

इतनी ग़ुरबत में मुस्कुराना, हुनर है,

पास हो तुम, फिर भी बुलाना, हुनर है,

क़त्ल करके, साफ़ करके दीवारों को,

हर सुबह अदालत को जाना, हुनर है!

-आपसे मुख़र हुए, जो इतनी उमर के बाद,

वो नजरों का अब भी झुक जाना, हुनर है!

इतनी ग़ुरबत में मुस्कुराना, हुनर है,

पास हो तुम, फिर भी बुलाना, हुनर है,

क़त्ल करके, साफ़ करके दीवारों को,

हर सुबह अदालत को जाना, हुनर है!

-वादा करना, मुस्कुरा के, फिर नज़र आना नहीं,

उसपर भी छोड़ देना ठिकाना, हुनर है!

इतनी ग़ुरबत में मुस्कुराना, हुनर है,

पास हो तुम, फिर भी बुलाना, हुनर है,

क़त्ल करके, साफ़ करके दीवारों को,

हर सुबह अदालत को जाना, हुनर है!

-नामचीनों में शुमार, आपका ख़ानाख़ाना,

नजर न आए ख़ानसामा, हुनर है!

इतनी ग़ुरबत में मुस्कुराना, हुनर है,

पास हो तुम, फिर भी बुलाना, हुनर है,

क़त्ल करके, साफ़ करके दीवारों को,

हर सुबह अदालत को जाना, हुनर है!

-'ऐ दर्द' तूने अपने पास, रखी थी जो रहगुज़र,

उसपर अकेले ही चलते जाना, हुनर है!

इतनी ग़ुरबत में मुस्कुराना, हुनर है,

पास हो तुम, फिर भी बुलाना, हुनर है,

क़त्ल करके, साफ़ करके दीवारों को,

हर सुबह अदालत को जाना, हुनर है!