नवरात्रि दिवस 3 🌸 देवी चंद्रघंटा की कथा और महत्व
द हिडन ब्लूप्रिंट | Code Devi di Satyajit Tripathi
Note sull'episodio
🌸 नवरात्रि के तीसरे दिन माँ दुर्गा के तृतीय स्वरूप — देवी चंद्रघंटा की उपासना की जाती है।
वे सिंह पर सवार, दस भुजाओं में शस्त्र धारण किए हुए, और मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित करती हैं। वे शक्ति और शांति के अद्भुत संतुलन की प्रतीक हैं।
🙏 चंद्रघंटा हमें यह सिखाती हैं कि सच्ची शक्ति केवल विजय में नहीं, बल्कि संतुलन और शांति स्थापित करने में है। वे हमें भीतर से शांत और बाहर से सदैव सजग रहने का संदेश देती हैं।
इस एपिसोड में जानें:
✨ देवी चंद्रघंटा की कथा और उत्पत्ति ✨ नवरात्रि के तीसरे दिन उनकी पूजा का कारण ✨ 'चंद्र' और 'घंटा' के आध्यात्मिक प्रतीक ✨ संतुलन, साहस और आंतरिक शांति का संदेश
यह हमारी नवरात्रि 2025 श्रृंखला का भाग है, जिसमें हम माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों और उनके गहन संदेशों की चर्चा कर रहे हैं।
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