ईश्वर अर्जुन संवाद श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 42 - ज्ञान के प्रकाश से संशय को दूर करें

गीता का सार (Geeta Ka Saar) #BhagavadGita #SpiritualKnowledg... di Mohit Sharma

Note sull'episodio

"क्या आप जीवन की कठिनाइयों से जूझ रहे हैं? श्रीमद्भगवद्गीता में आपकी सभी समस्याओं का समाधान छुपा है। इस वीडियो में जानिए कैसे भगवद्गीता के अध्याय और श्लोक आपकी समस्याओं का समाधान दे सकते हैं। चाहे वो डर हो, लालच, क्रोध, आलस्य, या शांति की तलाश—हर समस्या का उत्तर यहाँ मिलेगा।

🔸 समस्याओं के समाधान: कौन से अध्याय और श्लोक आपकी समस्याओं का उत्तर देते हैं? जानने के लिए वीडियो देखें।

🔸 उच्चारण की विधि: गीता के श्लोकों का सही उच्चारण कैसे करें? सरल विधि और तकनीक के साथ जानिए।

👉श्लोक 42 में श्रीकृष्ण कहते हैं:

तस्मादज्ञानसम्भूतं हृत्स्थं ज्ञानासिनात्मनः । छित्त्वैनं संशयं योगमातिष्ठोत्तिष्ठ भारत ॥

अर्थात, जो व्यक्ति अपने ज्ञान के साथ अपने संशयों को समाप्त करता है, वह आत्म-ज्ञान में स्थित होकर स्थिर और शुद्ध होता है।

यह श्लोक हमें सिखाता है कि आत्म-ज्ञान से ही हम अपने भीतर की भ्रम और अविश्वास को समाप्त कर सकते हैं।

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