'Wah! Ye Diariyaan' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐं)!'

'Wah! Ye Diariyaan' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐं)!'

por Mahesh Vallabh Pandey 'ऐ दर्द!'
Temporada 9

81. S09 - E01 ज़िंदगी बहुत भारी सी है🙃

कितने ग़मों की सवारी सी है🙃
Temporada 8

80. S08 - E10 शबनम भी है, तो मैली सी है😔

क्या करें, सब ठहरी सी है😔

79. S08 - E09 दायरे इश्क़ के सिमट गये हैं❤️

हुस्न भी राह में भटक गये हैं❤️

78. S08 - E08 मेरी हैरत है अंजाम उनका🍷

मेरा अंजाम है आग़ाज़ उनका🍷

77. S08 - E07 हैं और भी शिकवे😊

ज़माने में आज कल😊

76. S08 - E06 ये कौन सा अंजाम है🤔

न गुनाह पता, ना मज़लूम🤔

75. S08 - E05 लोग कहते हैं 😌

S08 - E05 कि वो है हंसाने वाला😌

74. S08 - E04 हक से ना माँगो हक🥺

ख़ैरात मिलेगी🥺

73. S08 - E03 कुरेदों मेरे ज़ख्मों को🥳 

🥳 कि अभी जीना है मुझे

72. S08 - E02 क्या हुआ जो आज हमसे😠

तुम मिले हो इस तरह😠
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