

पितर कौन हैं?
Notas del episodio
धर्म कथा · पहला सीज़न: पितृ पक्ष · एपिसोड 1
सुबह का समय है। घाट पर हल्का कोहरा है। एक आदमी घुटनों तक ठंडे पानी में खड़ा है। मुँह दक्षिण की ओर। दक्षिण, यानी यम की दिशा। पितरों की दिशा। हथेली में थोड़ा-सा जल है। कुछ काले तिल। कुश की पत्तियाँ। वह धीरे से एक नाम लेता है। पिता का। फिर एक और नाम। दादा का। फिर तीसरा। परदादा का। वे, जिन्हें उसने कभी देखा नहीं, जिनका नाम बस उसने अपने पिता के मुँह से एक बार सुना था।
स्रोत। श्रेणी: शास्त्र और जीवित परंपरा। पिता, पितामह और प्रपितामह को वसु, रुद्र और आदित्य के समान मानने का वचन मनुस्मृति, अध्याय तीन, श्लोक दो सौ चौरासी में है। पितरों और यम के मंत्र ऋग्वेद के दशम मंडल के चौदहवें और पंद्रहवें सूक्त में हैं। तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध की विधि जीवित परंपरा से है। इस वर्ष की तिथियाँ पंचांग के अनुसार हैं।
सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में ...