Notas del episodio
एक समय की बात है, नन्दरानी यशोदा जी ने घर की सभी दासियों को तो दूसरे कामों में लगा दिया और स्वयं अपने लाला को माखन खिलाने के लिए दही मथने लगीं। मैया कन्हैया की लीलाओं का स्मरण करतीं और गाती भी जाती थीं। नन्दबाबा के यहाँ हजारों सेवक-सेविकायें थी, लेकिन लाला का काम मैया अपने हाथों से ही करती थीं।Our initiatives need your support: https://rzp.io/l/brajsundardasSupport our causePaypal: https://paypal.me/bdpayments?country.x=IN&locale.x=en_GB