: “धोखे का दाग, इंसानियत का रंग”
: “धोखे का दाग, इंसानियत का रंग”

AT CASHIER`S WINDOW counting cash collecting stories por MADHAVII ROY

Notas del episodio

होली का त्योहार , बाज़ार में रंग, पिचकारियाँ, मिठाइयों की खुशबू… हर तरफ हलचल थी।

लेकिन बैंक के अंदर— रंग नहीं, सिर्फ जिम्मेदारियाँ होती हैं।

पिछले साल, होली से एक दिन पहले, मेरे काउंटर पर एक छोटा सा डिब्बा रखा गया था— घर की बनी गुजिया का।

पर वो सिर्फ मिठाई नहीं थी… वो कृतज्ञता थी। वो विश्वास था। वो एक चुपचाप कही गई “धन्यवाद” थी।

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