ईश्वर अर्जुन संवाद श्रीमद्भगवद्गी...
ईश्वर अर्जुन संवाद श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 38 - परम ज्ञान की शुद्धता और शक्ति
गीता का सार (Geeta Ka Saar) #BhagavadGita #SpiritualKnowledg... por Mohit Sharma
T4 · E26
16 nov 2024
18:16
Notas del episodio

"क्या आप जीवन की कठिनाइयों से जूझ रहे हैं? श्रीमद्भगवद्गीता में आपकी सभी समस्याओं का समाधान छुपा है। इस वीडियो में जानिए कैसे भगवद्गीता के अध्याय और श्लोक आपकी समस्याओं का समाधान दे सकते हैं। चाहे वो डर हो, लालच, क्रोध, आलस्य, या शांति की तलाश—हर समस्या का उत्तर यहाँ मिलेगा।

🔸 समस्याओं के समाधान: कौन से अध्याय और श्लोक आपकी समस्याओं का उत्तर देते हैं? जानने के लिए वीडियो देखें।

🔸 उच्चारण की विधि: गीता के श्लोकों का सही उच्चारण कैसे करें? सरल विधि और तकनीक के साथ जानिए।

👉श्रीकृष्ण भगवद गीता के श्लोक 38 में कहते हैं:

'न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।'

इसका अर्थ है, 'इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र और कुछ नहीं है।'

यह श्लोक हमें सिखाता है कि आत्मज्ञान ही वह शक्ति है, जो हमें हर प्रकार की अशुद्धियों से मुक्त कर सकती है। श्रीकृष्ण हमें इस ज्ञान को प्राप्त करने की प्रक्रिया के बारे में बताते हैं और यह भी कि ... 

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